LGBTQ+ समुदाय की ऐतिहासिक जीत: सुप्रीम कोर्ट ने समान-लिंग विवाह को दी मान्यता, गोद लेने की अनुमति
भारत में समान-लिंग विवाह को कानूनी मान्यता, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला। गोद लेने की अनुमति समेत सभी विवरण। Think India News पर पढ़ें पूरी कवरेज।
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2026 (Think India News): एक ऐसे फैसले में जिसे मानवाधिकारों के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है, सर्वोच्च न्यायालय ने समान-लिंग विवाह को पूर्ण कानूनी मान्यता दे दी है। इसके साथ ही, कोर्ट ने विवाहित समलैंगिक जोड़ों को संयुक्त रूप से बच्चा गोद लेने का अधिकार भी प्रदान कर दिया। मुख्य न्यायाधीश ने फैसला पढ़ते हुए कहा, "प्रेम और समानता को किसी लिंग की सीमा में बाँधना संविधान की भावना के खिलाफ है।"
फैसले का प्रभाव:
- अब भारत में समान-लिंग जोड़े कानूनी रूप से विवाह कर सकेंगे और उन्हें विवाहित जोड़ों के सभी अधिकार प्राप्त होंगे, जिनमें टैक्स लाभ, बीमा और वंशानुगत अधिकार शामिल हैं।
- बच्चा गोद लेने का प्रावधान 'सर्वोत्तम हित' के सिद्धांत पर आधारित होगा और गोद लेने वाली एजेंसियाँ लैंगिक पहचान के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकेंगी।
समुदाय की प्रतिक्रिया:
देशभर के प्राइड सर्कल्स में उत्सव का माहौल है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में हजारों लोग इंद्रधनुषी झंडे लेकर सड़कों पर उतरे और एक-दूसरे को मिठाई खिलाई। ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट गौरी सावंत ने Think India News से कहा, "यह हमारे संघर्ष का सबसे मीठा फल है। अब हमारा प्यार भी बराबरी का हकदार है।"
चुनौतियाँ अभी बाकी:
हालाँकि कानूनी लड़ाई जीत ली गई है, लेकिन सामाजिक स्वीकार्यता अभी भी बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अब संवेदीकरण अभियान और सख्त एंटी-डिस्क्रिमिनेशन कानूनों की जरूरत होगी।

