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इंटरनेट पर क्यों चर्चा में हैं गढ़वा के रूपेश और स्नेहा? जानिए 'Maa Garhdevi AI' बनाने वाले इस कपल के बारे में

गढ़वा के नामधारी कॉलेज में पढ़ने वाले रूपेश विश्वकर्मा और स्नेहा गुप्ता की कहानी इन दिनों चर्चा में है। स्नेहा के कहने पर रूपेश ने 17 महीने की कड़ी मेहनत के बाद Maa Garhdevi AI विकसित किया। दोनों पिछले 4-5 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन हालात ने उन्हें अलग कर दिया।

ByThinkIndia.press Bureau
Published On 13 जुल॰ 2026
इंटरनेट पर क्यों चर्चा में हैं गढ़वा के रूपेश और स्नेहा? जानिए 'Maa Garhdevi AI' बनाने वाले इस कपल के बारे में
Representative Image [ThinkIndia.press Bureau]

गढ़वा के नामधारी कॉलेज में एमएससी (MSc) मैथ ऑनर्स में पढ़ने वाले रूपेश विश्वकर्मा और स्नेहा गुप्ता की कहानी इन दिनों काफी चर्चा में है। स्नेहा के कहने पर रूपेश ने 17 महीने की कड़ी मेहनत के बाद "Maa Garhdevi AI", ट्रेडिंग एआई और कई ट्रैकिंग टूल्स विकसित किए। दोनों पिछले 4-5 साल से एक-दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन जब परिवार वालों को पता चला तो उनके प्यार के बीच दीवार खड़ी हो गई।

स्नेहा, रूपेश से पिछले 4-5 सालों से प्यार करती थी। स्नेहा के पिता सुबोध गुप्ता पेशे से एक कपड़ा व्यापारी हैं। वहीं, रूपेश के पिता अखिलेश विश्वकर्मा शिक्षा विभाग में एक जाने-माने अधिकारी हैं।

स्नेहा ने रूपेश से आखिर क्या करने को कहा था?

उन्हें पता था कि परिवार वाले उनके इस रिश्ते को आसानी से स्वीकार नहीं करेंगे। इसी बीच, स्नेहा ने रूपेश का हौसला बढ़ाया और उससे कहा कि वह "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)" बनाए, जिससे लोग उन्हें जानें, उनके पिता का नाम ऊंचा हो और शायद तब जाकर परिवार वाले उनकी शादी के लिए मान जाएं। स्नेहा की इसी एक बात ने रूपेश को एक नया मकसद दे दिया।

रूपेश ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ एआई पर रिसर्च करना शुरू किया। यह सफर आसान नहीं था। कई बार असफलता हाथ लगी और एक वक्त ऐसा भी आया जब रूपेश हार मानकर इसे छोड़ना चाहता था। लेकिन स्नेहा ने उसका साथ नहीं छोड़ा। उसने रूपेश का हाथ थामे रखा और कहा, "हम साथ हैं तो डरना क्यों, जो होगा देखा जाएगा।" स्नेहा के इसी अटूट विश्वास और समर्थन की बदौलत रूपेश ने 17 महीनों की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार सफलता हासिल की।

रूपेश ने सबसे पहले "Maa Garhdevi AI" बनाकर पूरे झारखंड को चौंका दिया। इससे पहले उसने इसका नाम 'रूपेश v3' और फिर 'स्नेहा v3' रखा था। इसके अलावा रूपेश ने ट्रेडिंग एआई और अपने कॉलेज के लिए वेबसाइट भी विकसित किए, जो अपने आप में एक मिसाल है।

प्यार की राह में आई मुश्किलें

गढ़वा - कॉलेज और ट्यूशन में हर किसी को पता था कि रूपेश और स्नेहा एक-दूसरे से कितना प्यार करते हैं। स्नेहा ने रूपेश को कभी अपनी नजरों से दूर नहीं रखा। लेकिन इस सफलता और प्यार के बीच अचानक कई मुश्किलें आ खड़ी हुईं। हद तो तब हो गई जब रूपेश रमना से आ रहा था और बीच रास्ते में उसका एक्सीडेंट हो गया, या यूं कहें कि किसी ने उसे जान से मारने की कोशिश की।

रूपेश हमेशा स्नेहा से कहता था कि उसे डर लगता है, कोई उसे मार देगा। लेकिन किसी ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। जब यह बात दोनों के घरवालों को पता चली, तो दोनों परिवारों ने अपनी इज्जत बचाने के लिए इस मामले को शांत करने की कोशिश की। और इसी मौके का फायदा उठाकर स्नेहा के पिता ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी।

युवाओं का डर और परिवार का दबाव

आखिर आज के बच्चे करें भी तो क्या करें? अगर वे घर में अपने प्यार के बारे में बात करते हैं, तो उन्हें यह डर सताता है कि कोई उनसे उनका प्यार छीन न ले, जिसे वे दुनिया में सबसे ज्यादा चाहते हैं। इसी डर से वे अपने रिश्ते को दुनिया से छुपा कर रखते हैं। और अगर वे हिम्मत करके घर में बता भी देते हैं, तो परिवार वाले बातचीत बंद करवा देते हैं, तरह-तरह की गालियां देते हैं, मारपीट करते हैं और यहां तक कि उन्हें घर में नजरबंद कर देते हैं। जब इतने पर भी बात नहीं बनती, तो अपनी इज्जत बचाने के लिए उनकी चोरी-छिपे कहीं और शादी तक कर देते हैं।

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