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लिव-इन रिलेशनशिप पर कानूनी मान्यता का नया युग: अब रजिस्ट्रेशन के बाद मिलेगी पति-पत्नी जैसी सुरक्षा

लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता, नया विधेयक पेश। जानें क्या होंगे अधिकार और क्या है पूरी प्रक्रिया। Think India News की विस्तृत खबर।

ByThinkIndia.press Bureau
Published On 12 अग॰ 2026
लिव-इन रिलेशनशिप पर कानूनी मान्यता का नया युग: अब रजिस्ट्रेशन के बाद मिलेगी पति-पत्नी जैसी सुरक्षा
Representative Image [ThinkIndia.press Bureau]

नई दिल्ली, 05 अगस्त 2026 (Think India News): केंद्र सरकार ने लिव-इन संबंधों को कानूनी मान्यता देने के लिए 'लिव-इन रिलेशनशिप (रजिस्ट्रेशन और संरक्षण) विधेयक, 2026' को लोकसभा में पेश किया। इस विधेयक के तहत, विषमलैंगिक और समलैंगिक जोड़े अपने संबंध को एक निर्धारित पोर्टल पर पंजीकृत करा सकेंगे, जिससे उन्हें विरासत, स्वास्थ्य बीमा, घरेलू हिंसा से सुरक्षा और संपत्ति अधिकार जैसे कई कानूनी अधिकार प्राप्त होंगे।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ:
- 18 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी दो वयस्क व्यक्तियों को एक साथ रहने का अधिकार, बशर्ते वे स्वेच्छा से हों।
- रजिस्ट्रेशन के लिए एक छोटी सी प्रक्रिया और न्यूनतम दस्तावेज।
- यदि कोई एक साथी संबंध तोड़ता है, तो दूसरे को भरण-पोषण और मुआवजे का प्रावधान, खासकर यदि उसने अपना करियर छोड़ा हो।
- इस संबंध से पैदा हुए बच्चों को जैविक माता-पिता की संपत्ति और उत्तराधिकार में पूर्ण अधिकार।

राजनीतिक और सामाजिक बहस:
विपक्ष ने विधेयक का स्वागत करते हुए इसे 'आधुनिक भारत की जरूरत' बताया, जबकि कुछ पारंपरिक नेताओं ने इसे 'विवाह संस्था पर हमला' करार दिया। Think India News द्वारा कराए गए एक सर्वेक्षण में, 68% शहरी युवाओं ने इस कानून का समर्थन किया, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह समर्थन 41% रहा।

जीवन पर असर:
यह कानून उन लाखों जोड़ों को राहत देगा जो सामाजिक दबाव या तलाक की लंबी प्रक्रिया के कारण विवाह नहीं कर पाते। साथ ही, यह घरेलू हिंसा और आर्थिक शोषण के मामलों में त्वरित कानूनी सहायता सुनिश्चित करेगा।

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