भवनाथपुर: सेल की 3,500 एकड़ टाउनशिप का वीराना, खदानों की बंदी और कबाड़ माफिया का खुला साम्राज्य
एशिया की कभी सबसे बड़ी डोलोमाइट खदानें खंडहर में तब्दील, ₹500 करोड़ की परिसंपत्तियों पर गैस कटर से कबाड़ माफिया की लूट, 15 हजार कामगारों का पलायन और खदानों के पुनरुद्धार की सुगबुगाहट।
भवनाथपुर (गढ़वा): भवनाथपुर का नाम कभी एशिया के सबसे बड़े डोलोमाइट और चूना पत्थर आपूर्तिकर्ता के रूप में दर्ज था, जहाँ से बोकारो, राउरकेला और दुर्गापुर स्टील प्लांटों को कच्चा माल भेजा जाता था। 3,500 एकड़ में फैली स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) की यह आधुनिक टाउनशिप कभी हजारों परिवारों के रोजगार, क्लबों की रौनक, सुसज्जित अस्पतालों और केंद्रीय विद्यालय की गूंज से आबाद थी। किंतु 1990 के दशक के उत्तरार्ध में खदानों के तकनीकी रूप से अव्यवहारिक होने और लीज नवीनीकरण में राज्य व केंद्र के बीच तालमेल के अभाव ने इस औद्योगिक नगरी की रीढ़ तोड़ दी।
भवनाथपुर का विस्थापन व पतन चक्र
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│ सेल (SAIL) खनन │ (तुलसीदामर व घघरा माइंस बंद)
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[आधारभूत ढांचे का विनाश] [जनसांख्यिकीय संकट]
• ₹500 करोड़ की परिसंपत्तियां वीरान • 15,000+ कामगार बेरोजगार
• अस्पताल, क्लब, स्कूल खंडहर बने • गुजरात, सूरत व मुंबई पलायन
• कबाड़ माफिया द्वारा स्ट्रक्चर की चोरी • गांवों में केवल बुजुर्ग व बच्चे शेष
1. गैस कटरों से सार्वजनिक संपत्ति की डकैती
टाउनशिप से सीआईएसएफ (CISF) की सुरक्षा टुकड़ी हटने के बाद भवनाथपुर कबाड़ माफियाओं की खुली चारागाह बन चुका है। ग्रीन लाइन न्यूज़ की खोजी पड़ताल में उजागर हुआ कि रात के सन्नाटे में गैस कटरों से विशाल पानी की टंकियों, भारी पाइपलाइनों, रेलवे ट्रैक के स्लीपरों और आवासीय भवनों की खिड़कियों-दरवाजों को काटकर ट्रकों में लोड किया जाता है। यह कबाड़ सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) और वाराणसी की री-रोलिंग मिलों में कौड़ियों के भाव खपाया जा रहा है।
2. खदानों के पुनरुद्धार की मांग और पलायन की मार
भवनाथपुर, खरौंधी और केतार प्रखंडों से हर महीने सैकड़ों युवक जनरल बोगी में लदकर सूरत के कपड़ा मिलों और महाराष्ट्र के निर्माण स्थलों पर जाने को मजबूर हैं। स्थानीय जनसंगठनों ने मांग तेज कर दी है:
- लीज का अविलंब नवीनीकरण: तुलसीदामर और सिंदूरिया माइंस की लीज का नवीनीकरण कर सेल स्वयं यहाँ कैल्सिनेशन प्लांट लगाए या वैश्विक नीलामी करे।
- 20,000 रोजगार की संभावना: यदि ये खदानें पुनः शुरू हों, तो गढ़वा, पलामू और बिहार के रोहतास जिले के 20,000 से अधिक कामगारों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. भवनाथपुर में सेल की खदानें कब और क्यों बंद हुईं?
1990 के दशक के अंत में सिलिका की मात्रा बढ़ने और लीज नवीनीकरण न होने के कारण उत्पादन ठप हो गया।
Q2. टाउनशिप का कबाड़ कहाँ भेजा जा रहा है?
अवैध सिंडिकेट द्वारा सोनभद्र (यूपी) और वाराणसी की री-रोलिंग मिलों में ट्रकों के जरिए खपाया जाता है।
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