Systemiq स्टडी की चेतावनी: 65% तेजी से पिघल रहे हिमालय के ग्लेशियर, ब्लैक कार्बन बना बड़ा खतरा
ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी फर्म Systemiq की रिपोर्ट: हिमालय के ग्लेशियर एक दशक पहले की तुलना में 65% तेजी से पिघल रहे हैं। मैदानी इलाकों के ईंट-भट्ठों से निकलने वाला ब्लैक कार्बन 33% पिघलन का जिम्मेदार।
लंदन / नई दिल्ली: वैश्विक पर्यावरण शोध संस्था Systemiq द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को स्तब्ध कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार हिंदूकुश हिमालय के ग्लेशियर पिछले एक दशक की तुलना में 65% अधिक तीव्र गति से पिघल रहे हैं।
अध्ययन के सबसे चौंकाने वाले बिंदु:
- ब्लैक कार्बन (कालिख) का कहर: ग्लेशियरों के पिघलने का 33% कारण मैदानी इलाकों के ईंट-भट्ठों, पराली और डीजल वाहनों से निकलने वाली कालिख है, जो बर्फ पर चिपककर धूप सोखती है।
- भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर: हिमालय का जल तंत्र भारत की 20% जीडीपी को जीवनरेखा प्रदान करता है। यदि यह पिघलन नहीं थमी, तो गंगा, सिंधु और ब्रह्मपुत्र बेसिन में भयानक सूखा और बाढ़ आएगी।
- वैज्ञानिकों की अपील: तत्काल प्रभाव से ग्रीन ब्रिक-किलन टेक्नोलॉजी और शून्य-उत्सर्जन वाहनों को अनिवार्य किया जाए।
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पर्यावरण व क्लाइमेट डेस्क is a senior correspondent at Greenline News covering environment, Garhwa regional updates, and breaking news across Jharkhand.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
Great coverage by Greenline News. Looking forward to further updates on Garhwa and Jharkhand developments.