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रिश्तों में यौन अंतरंगता: बिस्तर से परे की बातचीत

लखनऊ। किसी भी दीर्घकालिक रिश्ते की सफलता का राज सिर्फ प्यार या त्याग नहीं, बल्कि यौन अंतरंगता को लेकर खुलकर हुई बातचीत भी है। लेकिन दुर्भाग्य से, ह...

ByThinkIndia Global Bureau
Published On Aug 12, 2026
रिश्तों में यौन अंतरंगता: बिस्तर से परे की बातचीत
Representative Image [ThinkIndia Global]

लखनऊ। किसी भी दीर्घकालिक रिश्ते की सफलता का राज सिर्फ प्यार या त्याग नहीं, बल्कि यौन अंतरंगता को लेकर खुलकर हुई बातचीत भी है। लेकिन दुर्भाग्य से, हमारे समाज में पति-पत्नी के बीच भी सेक्स पर बात करना कठिन माना जाता है। कपल्स थेरेपिस्ट डॉ. शालिनी वर्मा बताती हैं, “मेरे पास आने वाले 80 प्रतिशत जोड़ों की शिकायतें सीधे यौन संबंधों से जुड़ी नहीं होतीं, बल्कि भावनात्मक दूरी और अधूरी उम्मीदों से जुड़ी होती हैं।”

‘सेक्सुअल कम्युनिकेशन’ एक ऐसा कौशल है जिसे सीखा जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बातचीत की शुरुआत सकारात्मकता से करें। अपनी पसंद-नापसंद ‘मैं’ से शुरू होने वाले वाक्यों में कहें, जैसे “मुझे अच्छा लगता है যখন…” या “मैं चाहता/चाहती हूं कि हम…” आलोचनात्मक लहज़े से बचें। हो सकता है कि एक साथी को भावनात्मक जुड़ाव से उत्तेजना मिलती हो और दूसरे को सीधे शारीरिक संपर्क से। इन अंतरों को समझना ही सामंजस्य का आधार है।

शोध बताते हैं कि स्पर्श, आलिंगन और चुंबन जैसी गैर-यौन शारीरिक अंतरंगताएं उसी ऑक्सीटोसिन हार्मोन को रिलीज़ करती हैं जो यौन संबंध के दौरान निकलता है। जो जोड़े बिना यौन अपेक्षा के एक-दूसरे को स्पर्श करते हैं, उनकी यौन संतुष्टि भी अधिक होती है। पुरुषों पर पड़ने वाला ‘प्रदर्शन का दबाव’ भी कई बार अंतरंगता के आड़े आता है। मर्दानगी की झूठी परिभाषाओं ने यह भ्रम पैदा कर दिया है कि आदमी को हमेशा सेक्स के लिए तैयार रहना चाहिए। जब ऐसा नहीं हो पाता, तो वह विफलता का बोध लेकर बातचीत से ही कतराने लगता है।

आधुनिक समय में ‘डेट नाइट्स’ और ‘डिजिटल डिटॉक्स’ जैसी अवधारणाएं यौन जीवन को सुधारने के लिए ही आई हैं। सोने के कमरे में मोबाइल फोन का प्रवेश आपसी संवाद का सबसे बड़ा शत्रु बनकर उभरा है। यौन चिकित्सक एकमत हैं कि सप्ताह में कम से कम 15 मिनट का ‘रिलेशनशिप चेक-इन’ यानी आपसी भावनाओं की समीक्षा, यौन जीवन को वर्षों तक जीवंत बनाए रख सकती है। बात करें, सुनें और सम्मान करें – अंतरंगता का त्रिदेव यही है।

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