भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची: वैश्विक तेल संकट के बावजूद उम्मीदों से बेहतर, लेकिन आंकड़ों पर बहस
2026-27 की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% की दर से बढ़ी; निर्यात में 12% का उछाल और निजी निवेश में तेजी, सरकार और विपक्ष में तकरार।
नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) में 7.8% की शानदार जीडीपी वृद्धि दर दर्ज कर सभी विश्लेषकों को चौंका दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन आंकड़ों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर कहा कि भारत ने वैश्विक निराशावाद को पीछे छोड़ते हुए विकास का नया परचम लहराया है।
ग्रोथ के प्रमुख कारक
- निर्यात में 12% की बढ़ोतरी: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता का सीधा लाभ भारतीय उत्पादों को मिला।
- ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन में 12% उछाल: कई वर्षों की सुस्ती के बाद निजी कॉरपोरेट निवेश में मजबूत उछाल दर्ज किया गया।
- जेपी मॉर्गन के मुख्य अर्थशास्त्री सज्जिद चिनॉय ने होर्मुज जलडमरूमध्य की बाधाओं के बावजूद ऊर्जा स्रोतों में विविधीकरण और ब्याज दरों में 1.5% कटौती को विकास का इंजन बताया।
हालांकि, विपक्षी दलों ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए इसे 'सांख्यिकीय बाजीगरी' करार दिया और पिछले वर्ष के निचले आधार (लो बेस) का हवाला दिया।
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इकनॉमिक ब्यूरो is a senior correspondent at Greenline News covering व्यापार and related global events.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.