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क्राइम व जांच

सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ कड़े कानून: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश और कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकार

यौन उत्पीड़न, पॉश (POSH) एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत महिलाओं की सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश और शिकायत निवारण प्रक्रिया।

विधि संवाददाता
विधि संवाददाता
12 सितंबर 2026 6 मिनट read
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सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ कड़े कानून: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश और कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकार
सेक्शुअल हैरेसमेंट के खिलाफ कड़े कानून: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्देश और कार्यस्थल पर महिलाओं के कानूनी अधिकार - Greenline News

नई दिल्ली: कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा और लैंगिक समानता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारी, स्वायत्त और निजी संस्थानों को यौन उत्पीड़न रोकथाम (POSH) कानून का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि कार्यस्थल भयमुक्त, सुरक्षित और सम्मानजनक होना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। कानून की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

कानूनी प्रावधान और जरूरी दिशानिर्देश:

  • आंतरिक शिकायत समिति (ICC): 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संस्थान में वरिष्ठ महिला अधिकारी की अध्यक्षता में आंतरिक शिकायत समिति का गठन अनिवार्य है।
  • गोपनीय व समयबद्ध जांच: किसी भी शिकायत की जांच 90 दिनों के भीतर पूरी की जानी चाहिए और पीड़िता की पहचान पूर्णतया सुरक्षित रखनी होगी।
  • कड़े दंड के प्रावधान: भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) या अभद्र व्यवहार के मामलों में गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा चलाने की व्यवस्था है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन अधिकारों और आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों (1090, 112) की जन-जागरूकता से समाज में महिलाओं के प्रति सुरक्षित वातावरण तैयार होगा।

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About विधि संवाददाता

विधि संवाददाता is a senior correspondent at Greenline News covering क्राइम व जांच, Garhwa regional updates, and breaking news across Jharkhand.

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Comments (2)

JD
John Doe2 hours ago

Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.

AS
Alice Smith5 hours ago

Great coverage by Greenline News. Looking forward to further updates on Garhwa and Jharkhand developments.