भारत में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य होने की ओर: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दिया औपचारिक भरोसा
26-सदस्यीय राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर केंद्र सहमत; NEP-2020 के तहत प्राथमिक कक्षाओं से 'गुड टच-बैड टच' और स्वच्छता की अनिवार्य पढ़ाई होगी।
नई दिल्ली: दशकों से चली आ रही हिचकिचाहट को तोड़ते हुए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह देश के सभी स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों में 'व्यापक सेक्स एजुकेशन' (Comprehensive Sex Education) को अनिवार्य रूप से लागू करने पर सहमत हो गई है। यह कदम नाबालिग गर्भधारण और POCSO मामलों में किशोरों के अनजाने उलझाव को रोकने के शीर्ष अदालत के निर्देश के बाद उठाया गया है।
विशेषज्ञ समिति की ऐतिहासिक सिफारिशें
- व्यापक यौन शिक्षा और बाल यौन शोषण रोकथाम को मुख्य पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाना।
- प्राथमिक विद्यालयों में ही एक समर्पित प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्त करना।
- सप्ताह में दो बार 15-20 मिनट की अनिवार्य कक्षाएं और अभिभावकों के साथ नियमित संवाद सत्र आयोजित करना।
- NEP-2020 के अनुरूप एडोलसेंट एजुकेशन को जीवन कौशल (Life Skills) के रूप में विकसित करना।
यदि यह योजना लागू होती है, तो यह भारत में यौन स्वास्थ्य को शर्म और वर्जनाओं से निकालकर वैज्ञानिक सुरक्षा और सहमति के आधुनिक ढांचे में स्थापित करेगी।
About लीगल ब्यूरो
लीगल ब्यूरो is a senior correspondent at Greenline News covering राष्ट्रीय and related global events.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.