ट्रांसजेंडर अधिकारों पर बड़ा विवाद: स्व-पहचान का अधिकार समाप्त करने वाले संशोधन पर देशव्यापी विरोध
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ट्रांस समुदाय सड़कों पर; मेडिकल बोर्ड सत्यापन और डीएम की अनुमति अनिवार्य किए जाने को 2014 के सुप्रीम कोर्ट फैसले का उल्लंघन बताया।
नई दिल्ली/चेन्नई: ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) संशोधन अधिनियम 2026 के लागू होने के बाद पूरे देश में LGBTQIA+ समुदाय ने तीव्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा हस्ताक्षरित इस कानून ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के स्व-पहचान (Self-Identification) के मौलिक अधिकार को समाप्त कर दिया है।
मेडिकल बोर्ड और प्रशासनिक जांच की बाध्यता
नए नियमों के तहत अब किसी भी व्यक्ति को अपनी लैंगिक पहचान दर्ज कराने के लिए मेडिकल बोर्ड के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा और जिला मजिस्ट्रेट (DM) से औपचारिक अनुमोदन लेना अनिवार्य होगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह प्रावधान 2014 के ऐतिहासिक NALSA फैसले के विरुद्ध है।
साथ ही, कानून में केवल पारंपरिक सांस्कृतिक श्रेणियों को प्राथमिकता देने से ट्रांस-पुरुष, नॉन-बाइनरी और जेंडर-फ्लुइड युवाओं में असुरक्षा की भावना गहरी हो गई है।
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मानवाधिकार डेस्क is a senior correspondent at Greenline News covering राष्ट्रीय and related global events.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.