सुप्रीम कोर्ट में वैवाहिक बलात्कार के अपवाद पर संवैधानिक परीक्षण: क्या पत्नी की सहमति अनिवार्य है?
IPC धारा 375 अपवाद 2 व BNS धारा 63 की वैधता पर शीर्ष अदालत में सुनवाई; कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपीलों पर संवैधानिक पीठ करेगी विचार।
नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत संवेदनशील और ऐतिहासिक कानूनी प्रश्न की जांच करने पर सहमति जताई है — क्या पति द्वारा पत्नी के साथ जबरन बनाए गए शारीरिक संबंध को बलात्कार की परिभाषा से बाहर रखने वाला वैधानिक अपवाद संविधान की कसौटी पर खरा उतरता है?
IPC 375 व BNS 63 पर विचार
चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत सामाजिक नैतिकता का नहीं, बल्कि संवैधानिक वैधता और नागरिकों की शारीरिक स्वायत्तता (Bodily Autonomy) का परीक्षण कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जायसिंग ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि विवाह किसी पुरुष को अपनी पत्नी को 'यौन दासी' समझने का असीमित लाइसेंस नहीं देता।
यह मामला भारत में वैवाहिक संबंधों के भीतर महिलाओं के मौलिक अधिकारों और सहमति की कानूनी व्याख्या में सबसे बड़ा निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट डेस्क is a senior correspondent at Greenline News covering राष्ट्रीय and related global events.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.