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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट का युगांतरकारी फैसला: सेक्स वर्कर्स 'अपराधी' नहीं, बल्कि 'पीड़ित' हैं — विक्टिम प्रोटेक्शन प्लान लागू

प्रज्वला बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में फैसला: वयस्क स्वैच्छिक कार्य और मानव तस्करी के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित; जबरन संस्थागतकरण पर रोक।

लीगल डेस्क
लीगल डेस्क
September 11, 2026 5 मिनट read
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सुप्रीम कोर्ट का युगांतरकारी फैसला: सेक्स वर्कर्स 'अपराधी' नहीं, बल्कि 'पीड़ित' हैं — विक्टिम प्रोटेक्शन प्लान लागू
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने Prajwala vs Union of India मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए देश में व्यावसायिक यौन शोषण के शिकार व्यक्तियों के लिए पहला व्यापक 'विक्टिम प्रोटेक्शन प्लान' लागू करने का आदेश दिया है। अदालत ने दो टूक कहा कि तस्करी के शिकार लोगों को अपराधी की बजाय संरक्षण का हकदार पीड़ित माना जाए।

स्वैच्छिक वयस्क कार्य और तस्करी में भेद

शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वेच्छा से कार्य करने वाली वयस्क महिलाओं और बलपूर्वक तस्करी की गई पीड़िताओं को एक तराजू में नहीं तौला जा सकता। पश्चिम बंगाल की 60,000 सेक्स वर्कर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले दुर्बार महिला समन्वय समिति (DMSC) ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे गरिमा और अधिकारों की ऐतिहासिक जीत बताया है।

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Comments (2)

JD
John Doe2 hours ago

Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.

AS
Alice Smith5 hours ago

I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.