भारत में सिफलिस का खतरनाक पुनरुत्थान: MSM समुदाय में प्रसार 15.6% तक पहुंचा, केरल में सतर्कता
जॉन्स हॉपकिन्स अध्ययन में खुलासा: एचआईवी का डर कम होने से असुरक्षित यौन संबंध बढ़े; केरल के 23 क्लिनिकों में मरीजों की संख्या 63,000 पार।
तिरुवनंतपुरम/बाल्टीमोर: जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन और भारतीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों के संयुक्त अध्ययन ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि भारत में पुरुषों के साथ यौन संबंध रखने वाले पुरुषों (MSM) में सिफलिस का प्रसार पिछले एक दशक में 2.9% से बढ़कर 15.6% तक पहुंच गया है।
एचआईवी का डर कम होने से बढ़ी लापरवाही
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि प्रभावी एंटीरेट्रोवायरल दवाओं के कारण लोगों में एचआईवी का भय कम हो गया है, जिससे कंडोम और सुरक्षा उपायों के प्रति लापरवाही बढ़ी है। केरल के 23 जिला एसटीआई केंद्रों में मरीजों की संख्या 41,417 से उछलकर 63,129 हो गई है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कंडोम सिफलिस और हर्पीज जैसे त्वचा संपर्क से फैलने वाले संक्रमणों को पूरी तरह नहीं रोक पाते, इसलिए नियमित RPR स्क्रीनिंग और तत्काल एंटीबायोटिक उपचार अनिवार्य है।
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हेल्थ रिपोर्टर is a senior correspondent at Greenline News covering राष्ट्रीय and related global events.
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Excellent reporting on this issue. It's crucial that we stay informed about these developments.
I wonder how this will affect the local communities in the long run. Would love to see a follow-up article.